उत्तर प्रदेश 

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कुम्भ २०१९, पृथ्वी पर इतिहास के सबसे बड़े जनसमूह में आपका स्वागत है |

यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त |

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कुम्भ में गहरी डुबकी

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यह कुम्भ ऐतिहासिक और अति विशेष होने जा रहा है | हम न केवल विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपितु विदेशी नागरिकों को भी विश्व की सबसे बड़ी मण्डली का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करते हैं |

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उपस्थिति में

15 करोड़ से अधिक लोग त्रिवेणी संगम, प्रयागराज में कुम्भ 2019 के साक्षी बनेंगे | जनसमूह के इस स्तर को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि यह अंतरिक्ष से भी दिखाई देता है और यह संख्या आपके मोबाइल के पटल पर भी नहीं समा सकती है | कोशिश करके देखेँ !

नरेन्द्र मोदीमाननीय प्रधानमंत्री

कुम्भ को भारतीय संस्कृति को महापर्व कहा गया है। प्रयागराज के इस संगम में कुम्भ के समय कई परम्पराओं, भाषाओं और लोगों का भी अद्भुत संगम होने वाला है। संगम तट पर स्नान और पूजन का तो विशिष्ट महत्व है ही, साथ ही कुम्भ का बौद्धिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार भी है।

योगी आदित्यनाथमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

कुम्भ वैश्विक पटल पर शांति और सामंजस्य का एक प्रतीक है। वर्ष २०१७ में यूनेस्को द्वारा कुम्भ को ‘‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’’ की प्रतिनिधि सूची पर मान्यता प्रदान की गयी है। यह दुनिया भर में कुम्भ के महत्व को दर्शाता है | उत्तर प्रदेश सरकार ने १५ जनवरी से ३१ मार्च, २०१९ तक दिव्य एवं भव्य कुम्भ की परिकल्पना की है |

राम नाईकराज्यपाल उत्तर प्रदेश

प्रयागराज में कुम्भ मेला देश और दुनिया के लिए एक अद्भुत घटना होगी और कुम्भ के माध्यम से दुनिया को एक परिवार के रूप में स्वीकार करने का संदेश पूरी दुनिया में जाएगा | पिछली तीन से चार शताब्दियों और आने वाले कुम्भों में एक बहुत बड़ा अन्तर है |

सुरेश कुमार खन्नानगर विकास मंत्री उत्तर प्रदेश

कुम्भ मेला भारत एवं विश्व के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर का एक केन्द्र माना जाता है और करोड़ों तीर्थयात्री इसी आस्था से प्रयागराज में पर्व के दौरान पधारते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके आयोजन के लिए 'दिव्य कुम्भ और भव्य कुम्भ' की परिकल्पना की है और इसी परिदृश्य में कुम्भ नगरी का चहुँमुखी विकास किया जा रहा है।