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अनुयायी (करोड़)
1100
हिन्दू धर्म का

परिचय

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हिन्दू धर्म का

परिचय

अनुयायी

दुनिया भर में १.१ अरब

आरम्भ

७०००-१०००० वर्ष पहले

शक्ति

दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा धर्म

सहिष्णुता

३३ करोड़ अनुमानित देवी और देवता

मार्मिक धर्म

हिन्दू धर्म, या ‘सनातन धर्म’ एक सामूहिक नाम है जो प्राचीन काल से भारतीय उपमहाद्वीप में चली आ रही संस्कृतियों और परम्पराओं को दर्शाता है। यह मुख्य रूप से अनेक मूलों का एक मार्मिक धर्म है और कोई एक इसका संस्थापक नहीं है।

शास्त्रीय हिन्दू धर्म के जन्म से पहले चार काल के माध्यम से हिन्दू धर्म का विकास हुआ।

शुरुआत – १७५० ईसा पूर्व

पूर्व वैदिक काल जहां कई सिंधु धर्म, सिंधु घाटी की सभ्यता के लोगों सहित, स्वतंत्र रूप से मौजूद थे।

(१९०० – १७००) ईसा पूर्व

वैदिक काल के रूप में प्रसिद्ध, यह वह समय था जब इंडो-आर्यन प्रवासियों ने धार्मिक मतों और दर्शनों का आदान-प्रदान किया था।

८०० – २०० ईसा पूर्व

कई दर्शनों के मेल-जोल ने हिंदू धर्म को समृद्ध किया और कई संबद्ध धर्मों का जन्म हुआ। जैसे बौद्ध धर्म और जैन धर्म।

२०० – ५००  ईसा पूर्व

प्रारंभिक पुराणिक काल हिन्दू धर्म के स्वर्णिम युग के साथ जुड़ा जब धर्म ने गुप्त साम्राज्य के अधीन सामूहिक स्वीकृति और संरक्षण प्राप्त किया।

हिन्दू दर्शन के छह उपखण्ड

हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहा जाता था। इसे एक सहिष्णु और मिलनसार धर्म के रूप में परिभाषित किया गया था, जिसने कई अलग-अलग विचारों को एक साथ बनाए रखने की स्वतंत्रता दी। इस प्रकार यह धर्म छह व्यापक दर्शनों के लिए एक आवरण था।

संख्य

ब्रह्माण्ड दो वास्तविकताओं से युक्त है – पुरुष (चेतना) और पृकृति (पदार्थ)

वैशेषिक

ज्ञान प्राप्ति के दो साधन हैं – अनुभूति और निष्कर्ष

योग

विश्वसनीय ज्ञान प्राप्त करने के साधन के रूप में तीन प्रमाण – प्रत्यक्ष (अनुभूति), अनुमान(निष्कर्ष) और शब्द (विश्वसनीय साक्ष्य)

मीमांसा

ज्ञान प्राप्त करने के लिए दो और साधन जुड़े – उपमान (सादृश्य) और अर्थपट्टी (आशा)

न्याय

तर्क, कार्यप्रणाली और ज्ञान पद्धति के सिद्धांतों का विकास

वेदान्त

उपनिषदों में निहित शिक्षाओं से प्राप्त, जिसे वेदान्त या वेदों का अर्क भी कहा जाता है

जीवन शैली।

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हिन्दू दर्शन

मुख्य देवी-देवताओं के आधार पर,

हिन्दू धर्म में चार

मूल संप्रदाय हैं

इन चार प्रमुख संप्रदायों के अलावा, श्रोता, गणपत, सूर्य, कुमार, आदि जैसे छोटे संप्रदाय हैं, जो हिन्दू धर्म में बहुकेन्द्रवाद को दर्शाते हैं।

वैष्णव
यह संप्रदाय भगवान विष्णु और उनके दस अवतारों या रूपों की पूजा करता है। इनमें सबसे प्रमुख भगवान राम और भगवान कृष्ण हैं।
शक्ति
यह संप्रदाय ऊर्जा को दिव्य स्त्री का अवतार मानता है, जिसमें परम देवी आदि प्रशक्ति है।
शैव
यह संप्रदाय सर्वोच्च रचनाकार और संहारक के रूप में भगवान शिव की पूजा करता है, अपने आसन्न और परालौकिक दोनों रूपों में।
स्मार्त
यह संप्रदाय सभी देवताओं को समान मानता है, और पंचदेवता – गणेश, शिव, शक्ति, विष्णु और सूर्य की पूजा को प्रोत्साहित करता है।

हिन्दू धर्म में जीवन के चार लक्ष्य

धर्म

नीतिपरायणता

अर्थ

जीविका के साधन

काम

मनोरथ और उत्पत्ति

मोक्ष

निर्वाण

निष्कर्ष में

हिन्दू धर्म इस विचार को मानता है कि किसी भी धर्म में कोई भी व्यक्ति अलग-अलग दर्शन द्वारा परिभाषित अलग-अलग रास्तों से मोक्ष या ज्ञान प्राप्त कर सकता है। इसलिए, कई धर्मों से पृथक होने के बजाय, हिन्दू धर्म ने सदैव उनका स्वागत किया।

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