Padma Shri Genadi Pechnikov Memorial Disha Ram Leela, Moscow, Russia

Date: 27th January 2019, Bharadwaj Stage

Russian- Indian Friendship society ‘Disha’ on the invitation from Ayodhya Research Institute, Ayodhya, will Perform Ram Leela in Kumbh Mela in Prayagraj organized by Uttar Pradesh Government from 27th- 28th January 2019. All these 12 actors are the pupils of late Sh. Genadi Pechnichov popularly known as Russian Rama. It is said that in Russian History, Ram Leela was performed in 1960. Sh. Genadi organized Ram Leela for 20 years. Expressing his happiness, Dr. Yogendra Partap, Director of Ayodhya Research Institute said that due to the ambitious efforts of C.M. Yogi Adityanath, the foreign actors are coming to perform Ram Leela in Ayodhya, Uttar Pradesh, India. It is stated that Russian-Indian Friendship Society ‘Disha’ started Ram Leela again after 40 years due to the sincere efforts of performers of P.M.Ershov Institute of Theatrical Art in memory of Padam Shree Sh. Genadi Pechnichov. The first presentation of Ram Leela was on 4th – 6th November 2018 on the auspicious occasion of Diwali. President of ‘Disha’ Dr.Rameshwar Singh expressed his special thanks to Chief Minister of Utter Pradesh Yogi Adityanath, Indian Ambassador H E D.B. Venkatesh Varma , Director Ayodhya Shodh Sansadhan Dr. Yogendr Partap Singh, Director of Sahitya Ganga Dr. Yogesh Dube, Director Jawahar Lal Nehru Cultural Centre Ms. Mahima Sikand, PGT Hindi of Embassy School of India Sh. Sushil Kumar, Hindi Teacher Sh. Kumar Vinayak and Sh. Santosh Mishra, Rector of P.M.Ershov Institute of Theatrical Art Dashinskiy Vitaliy Evgenyevich, Director of the Сhildren’s School of Theatrical Arts “Sem Ya» and G.M.Pechnikov Children’s Theater Smirnova Alla Leonidovna.

रूसी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला का संक्षिप्त दृश्य जानकारी।

1) सीता स्वयंवर

2) राम का अयोध्या में स्वागत

3)रानी कैकयी का वर मांगना

4) राम लक्ष्मण सीता वन गमन

5) सीता हरण

6) राम हनुमान भेंट

7)लंका में सीता

8) हनुमान का लंका जाना

9) राम रावण युद्ध

राम सीता का पुनर्मिलन

10) अयोध्या वापस लौटने का दृश्य

(रामलीला का प्रारंभिक दृश्य सीता स्वयंवर का है जहां राजा जनक, रानियों सहित कई योद्धा विराजमान है। राम के शिव धनुष भंजन के बाद राम का अयोध्या आगमन और राजा दशरथ का प्रसन्नता से राम को राजपाट सौंपने की घोषणा ने रानी कैकयी को वरदान मांगने को विवश किया। राजा दशरथ का शोकाकुल होना और फिर आज्ञा लेकर राम,लक्ष्मण और सीता का वन गमन दृश्य बहुत मनभावन एवं संवेदनात्मक बन पड़ा है। वन की सुंदरता एवं सोने के हिरण से प्रभावित सीता राम से हिरण लाने का निवेदन और फिर रावण द्वारा सीता हरण किया जाना है। वन में भटकते हुए अचानक हनुमान और सुग्रीव से राम का मिलना और सीता हरण का अंदाजा लगना आकर्षक है। सीता का रावण के राज्य में बंदी होना, हनुमान सीता की खोज में लंका जाते हैं और राम की अंगुठी दिखाना मन मोहित करता है। राम और रावण का भयानक युद्ध भी रूसी कलाकारों की रामलीला का आकर्षक स्वरूप है। अंत में सत्य की जीत के रूप में राम का विजय अभियान और अयोध्या लौटने का दृश्य इस रामलीला को नई बुलंदियों पर लाकर खड़ा करता है।

 

साहित्य से समाज की नब्ज को पहचानना, अतीत और वर्तमान दोनों के बीच एकात्मकता का भाव केवल और केवल साहित्य की पगड़ंड़ी से ही जोड़ा जा सकता है। साहित्य की अविरल धारा हमें वर्तमान से अतीत और कभी कभी भविष्य का भी वरण करने का आभास देती है। प्रवास में रहते हुए अनेक भारतीय लोगों ने अपने वतन से दूर अपनी माटी की महक को वास्तविकता या कल्पना में महसूस जरूर किया होगा। इसी अनुभव के आधार पर सन 2010 में रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा’ की स्थापना की गई। इस संस्था को एक एन.जी.ओ के रूप में स्थापित किया जा चुका है इसके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलते पंखों की उड़ान आपकी नजर :-

इस संघ का उद्देश्य दोनों राष्ट्रों के नागरिकों के बीच, वैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, दार्शनिक, व्यापारिक और नैतिक सांझेदारी को विश्व पटल पर स्थापित करने का है।
यह संस्था साहित्यिक गतिविधियों, गोष्ठियों , मेलों, सम्मेलनों, चर्चाओं, महोत्सवों, खेल प्रतियोगिताओं, फिल्म महोत्सवों, वाद-विवाद आदि के आयोजन के साथ साथ एक त्रैमासिक पत्रिका दिशा को भी प्रकाशित करता है। यह संघ रूसीभारतीयों की मैत्री प्रगाढता को प्रकट करता है क्योंकि इसके अंतर्गत संघ भारतीय और रूसी समाज के सरकारी एवं गैरसरकारी संगठनों के साथ मिलकर अनेक कार्यक्रमों को संचालित करता है।

 

दिशा संस्था सहयोगी के तौर पर जवाहर लाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र , भारतीय राजदूतावास, मॉस्को के साथ मिलकर अनेक कार्यक्रमों में अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यह संस्था हिंदी भाषा के प्रचारप्रसार को भी अपना अहम उद्देश्य मानती है जिसके अंतरगत हिंदी मित्र सम्मान एवं हिंदी सेवा सम्मान प्रतिवर्ष हिंदी दिवस पर विदेशी हिंदी सेवियों को प्रदान करती है
यह संस्था मॉस्को विश्वविद्यालय के अफ्रीकी एवं एशियन अध्ययन संस्थान के साथ साथ अन्य शहरों के विद्यार्थियों में रूसी छात्रों के बीच हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन करती है।
इस संस्था ने विद्वानों के साथ भूमंडलीकरण में भारत और रूस का सांस्कृतिक योगदान विषय के साथ साथ हिंदी की वर्तमान और भविष्य की अपार संभावनाओं के धरातल की खोज पर सार्थक चर्चा की थी।
26-27 अक्टुबर 2016 को तृतीय क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन, मॉस्को का भी भव्य आयोजन में सहयोगी के रूप में भाग लिया
विश्व भाषा साहित्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर देश विदेश के प्रकांड़ पंड़ितों के बीच हिंदी सम्मेलन करवा रहा है। इसी विषय को लेकर 13-17 मई 2018 को मॉस्को’ कजान एवं सेंटपीटर्स में सेमिनार कराए
यह संस्था इंडियन फिल्मस संस्था के साथ मिलकर क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों का उत्सव मनाने जा रही है।
कई सालों से बंद रेडियों की सेवाओं को उपरोक्त संस्था के साथ मिलकर ‘दिशा रेड़ियो’ के नाम से पुनः चालु कर रही है।
‘दिशा’ संस्था अयोध्या शोध संस्थान अयोध्या के साथ मिलकर रूस की रामलीला को भारता एवं रूस में पुनः चालु कर रही है। इसी साल नवम्बर के प्रथम सप्ताह में रूसी कलाकार भारत आयेंगे।

॥ पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव मेमोरियल ‘दिशा’ रामलीला,मॉस्को, रूस ॥

रूसी-भारतीय मैत्री संघ “दिशा” एवं अयोध्या शोध संस्थान अयोध्या के संयुक्त तत्वाधान में उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा पहाली  बार अयोध्या में 4-6 नवम्बर 2018 को आयोजित कार्यक्रम में भाग लिए अब प्रयागराज में 27-28, जनवरी, 2019 को रूसी कलाकार भगवान राम की लीला का मंचन करेंगे।  ये सभी 12 कलाकार रूसी राम के नाम से प्रसिद्ध गेनादी पेचनीकोव के शिष्य हैं। रूस में सन 1960 से रामलीला का इतिहास मिलता है । गेनादी जी ने लगभग 20 वर्ष रामलीला का मंचन किया है। इस आकर्षक प्रस्तुती पर अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डा योगेंद्र प्रताप  ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के महती प्रयासों का ही फल है जिनके कारण विदेशी कलाकार रामलीला  का मंचन करने भारत भूमि पर आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा’ ने यह रामलीला पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव की याद में लगभग चालीस वर्ष बाद यर्शोफ थियेटर के कलाकारों के माध्यम से पुनः मंचन शुरु किया है। इस रामलीला की पहली प्रस्तुति 4-6 नवम्बर 2018 को दीपावली के सुअवसर पर अयोध्या में हुई थी, अब दूसरी प्रयागराज में । दिशा के अध्यक्ष डा रामेश्वर सिहं ने उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ का, रुस में भारतीय राजदूत श्री डी बी वेंकटेश वर्मा, अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डा योगेंद्र प्रताप सिहं, साहित्य गंगा के निदेशक डा. योगेश दूबे, जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र की निदेशिका सुश्री महिमा सिकंद, एम्बेसी स्कूल ऑफ इंडिया के हिंदी शिक्षक श्री सुशील कुमार एवं श्री कुमार विनायक सहित श्री संतोष मिश्रा, इरशोव थिएटर के वाइस चांसलर श्री दासिंस्की वितालेय एवगेंएविच, चिल्डर्न स्कूल ओफ़ थिएटरिकल स्कूल, जी एम पेचनीकोव चिल्ड्रन थिएटर की निदेशिका श्रीमती समीरनोवा अल्ला लियोनिदोवना का भी आभार व्यक्त किया।

 

            गेनादी मिखाइलाव पेचनीकोव : एक विराट चरित्र

किसी भी समाज की नब्ज पहचानने के लिए वहाँ के कलाकारों, साहित्यकारो, नाटककारों, नृत्यकारों, चित्रकारों आदि कलावान लोगों के नेक कार्यों को भली भांति देखना चाहिए ताकि उस समाज का वास्तविक निरूपण किया जा सके। मुझे इस बात का सौभाग्य है कि मैंने मॉस्को में भारतीय संस्कारों के चलते फिरते एक महामानव को देखा। इस महामानव में रूसी और भारतीय संस्कृति की महक आज भी लगातार आ रही है। वह हरफनमौला, अति सहज, सरल, विनित और मस्त स्वभाव का रूसी नागरिक था। मगर कर्मों, आस्था, आचरण से वह भारतीय पौराणिक कथाओं का रूसी अवतार था। यह मेरे लिए नया अनुभव था। वह कलाकार था गेनादी मिखाइयल पेचनीकोव । इनका जन्म 8 सितंबर 1926 को मॉस्को में ही हुआ था। जिस तरह रूस सुंदर प्रकृति का देश है वैसे ही खुले मन से भारत की आत्मा को स्वीकार करने वाला कलाकार थे। गेनादी जी भारत की रामायण से काफी हद तक प्रभावित हुए। उन्होने जब रामायण को पढ़ा तो उनके मन में इसके अभिनय की बात उठी। उन्होने स्वयं यहाँ पर खेली जाने वाली रामलीला में राम की भूमिका निभानी शुरु की। यही अभिनय उनके व्यक्तित्व का भारतीयकरण कर पाने मे सफल हो पाया। इसी अभिनय ने उन्हे रूसी राम की पहचान दी जो सन 1960 से निरंतर गेनादी जी के थियेटर के माध्यम से प्रकट होता रहा है। गेनादी जी एक महान कलाकार,निदेशक और महामानव के रूप में थे। सन्‍ 1947 में मोस्को आर्ट थियेटर से ग्रेजुयेशन करने के बाद वे स्वयं अभिनय का शिक्षण देने लगे थे। यर्शोफ थियेटर के माध्यम से अनेक कलाकारों और बच्चों को राममय आदर्श व संस्कार प्रदान करने का महान कार्य करते रहे जिसके कारण उन्हे “बाल सम्मान “ से भी विभूषित किया गया। सन 2008 में श्रीमती देवी सिहँ प्रतिभा पाटिल के कर कमलों से “पद्मश्री” की उपाधि से भी नवाजा गया। इसके साथ साथ गेनादि जी सोवियत रूस की एकेदेमिक ऑफ मैंनेजमेंट इन एजुकेशन एंड कल्चर का सदस्य भी बनाया गया। वे सोवियत इंडियन फ्रेंडशिप सोसायटी के उपाध्यक्ष भी रहे। गेनादि जी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सोवियत-मंगोलिया फ्रेंडशिप सोसायटी के भी सदस्य रहे।

गेनादी जी की राम में आस्था को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हे पदमश्री की उपाधि से सम्मानित किया। मैंने देखा है जब गेनादी जी सावलें सरूप को धारण कर मंच पर आते तो उनके एक एक अंग और अभिनय की अदाकारी से राम का हुबहू लगते थे। उनके रोल के अनुसार रस प्रकट होते थे। उनके मुख से निकलने वाले रूसी भाषा के संवाद भी उन सभी को सहज अपनी ओर खिंचते ही नही थे बल्कि उसका पूरा अर्थ भी सरल ढंग से प्रकट करते थे। उनके आकर्षण में बंधे भारत के बडे नेता जैसे पं जवाहर लाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी आदि ने इनके रोल को देखकर प्रशंसा की है। गेनादी जी ने जब जब रामलीला के मंच पर अभिनय किया तब तब भारतीय संस्कृति और सभ्यता की विजय होती दिखाई दी। यह रामायण की जनलोक चेतना का ही प्रमाण था। गेनादी जी को सोवियत रूस एवं भारत सरकार की ओर से तो सम्मान मिला ही साथ में अनेक संस्थाओं ने भी समय समय पर गेनादि जी का सम्मान कर अपने आपको सम्मानित किया है।

गेनादी जी इस वर्ष 27 अप्रैल 2018 को ही इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं लेकिन उनकी फिल्म, नाटक और अभिनय की कला ने उनको सदा अमरता प्रदान की है –वे आज भी हमारे बीच हैं, वे आज भी मेरे रोम रोम से राम की चमक से प्रकट हैं, वे आज भी एक जीवंत संस्था और सजीव कलाकार हैं। उन्होंने अनेक भाषणों में इस बात को कहा है कि अभिनय जीवन है और राम भारतीयता का प्रतीक है। उन्होंने प्रत्येक जन्म राम की लीलाओं का गुणगान करना ही मोक्ष कहा है।

Ramleela Moscow, Russia
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